गैरसैंण सिर्फ नाम की राजधानी… हाईकोर्ट ने नेताओं को लताड़ा… कहा अब जनता को बेवकूफ बनाना बंद करें
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण को लेकर वर्षों से सियासत गर्म है, लेकिन ज़मीनी हकीकत आज भी जस की तस है। राजधानी का तमगा तो गैरसैंण को मिल चुका है, लेकिन सुविधाएं और व्यवस्थाएं अब भी देहरादून की गुलामी कर रही हैं।
हाल ही में उत्तराखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने गैरसैंण मुद्दे पर सरकार और नेताओं की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि, “हर बार चुनाव आते ही नेताओं का नया नारा आता है—हमें जिताओ, गैरसैंण को राजधानी बनाएंगे। अब जनता इस ढकोसले से थक चुकी है।”
हरीश रावत का बयान और फिर न्यायिक टिप्पणी
14 जुलाई को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अगर 2027 में कांग्रेस को मौका मिला तो गैरसैंण को वास्तविक राजधानी बना देंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके कार्यकाल में भराड़ीसैंण विधानसभा भवन की आधारशिला रखी गई और 5,000 की आवासीय क्षमता वाला भवन निर्माण कार्य शुरू किया गया था।
इस बयान के जवाब में न्यायमूर्ति थपलियाल ने कहा कि नेताओं को केवल वादे करने की आदत है। उन्होंने सवाल उठाया कि “अगर गैरसैंण में 8000 करोड़ की संपत्ति और मजबूत आधारभूत ढांचा है, तो फिर नेता वहां जाने से कतराते क्यों हैं?”
देहरादून केंद्रित विकास पर भी निशाना
जज थपलियाल ने राज्य सरकार को यह कहते हुए आड़े हाथों लिया कि, “अगर गैरसैंण को सही मायनों में राजधानी बनाया गया होता, तो आज गांव-गांव में अस्पताल, स्कूल और बिजली होती। लेकिन विकास आज भी देहरादून की सीमा में सिमटा हुआ है।”
विधानसभा सत्र पर सख्त टिप्पणी
न्यायालय ने संकेत दिए कि यदि सरकार ने गैरसैंण सत्र को सिर्फ दिखावे के लिए चुना है और ठोस नीति या मंशा नहीं दिखती, तो “विधानसभा सत्र को रोका भी जा सकता है।” यह चेतावनी सीधे तौर पर सरकार की नीयत और रणनीति पर सवालिया निशान है।
