उत्तराखंड में 153 पाकिस्तानी, अफगानी और बांग्लादेशियों को मिली नागरिकता… जानिये पूरा मामला
नागरिकता (संशोधन) अधिनियम – Citizenship Amendment Act (CAA) – के तहत उत्तराखंड में रह रहे 153 हिंदू शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। अब ये सभी लोग आधिकारिक रूप से भारतीय नागरिक माने जाएंगे।
केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य के गृह विभाग द्वारा विस्तृत जांच-पड़ताल के बाद पाकिस्तान से आए 147 और अफगानिस्तान से आए 6 लोगों के आवेदन स्वीकृत किए गए।
कितने आवेदन आए और कितने लंबित?
सीएए लागू होने के बाद उत्तराखंड में कुल:
-
पाकिस्तान से 189
-
अफगानिस्तान से 6
-
बांग्लादेश से 3
यानी कुल 198 लोगों ने नागरिकता के लिए आवेदन किया था।
देहरादून चैप्टर से इन सभी का पंजीकरण किया गया।
इनमें से 153 को नागरिकता प्रदान कर दी गई है।
वर्तमान में केंद्र सरकार के पास 45 आवेदन लंबित हैं, जिनमें:
-
पाकिस्तान से 42
-
बांग्लादेश से 3
आवेदन शामिल हैं।
कहां के हैं ये लोग?
अधिकांश आवेदक पाकिस्तान के सिंध और बलूचिस्तान क्षेत्र से संबंधित बताए जा रहे हैं।
इनके परिजन पहले से ही उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में निवास कर रहे हैं, जैसे:
-
Dehradun
-
Rishikesh
-
Haridwar
-
Udham Singh Nagar
यहीं इन्हें आश्रय मिला और लंबे समय से ये परिवार यहां रह रहे थे।
CAA का प्रावधान क्या कहता है?
केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन करते हुए CAA लागू किया था। इस कानून के तहत 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में शरण लेने वाले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है।
गृह मंत्री करेंगे सम्मान
केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah सात मार्च को हरिद्वार दौरे पर आ रहे हैं। इस अवसर पर इन नव नागरिकों के सम्मान की तैयारी की जा रही है। संबंधित परिवारों को कार्यक्रम में आमंत्रित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री का बयान
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम वर्षों से भटक रहे परिवारों को सम्मान और अधिकार देने वाला है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री Narendra Modi और गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया।
निष्कर्ष
यह निर्णय उत्तराखंड में रह रहे उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है जो वर्षों से नागरिकता की प्रतीक्षा कर रहे थे। CAA के तहत प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब ये परिवार कानूनी रूप से भारतीय नागरिक बन चुके हैं और उन्हें सभी संवैधानिक अधिकार प्राप्त होंगे।
