उत्तराखंड की फूलदेई पर मुग्ध हुए आनंद महिंद्रा, दुनिया तक पहुंचाने की कही बात
Anand Mahindra ने उत्तराखंड के पारंपरिक लोक पर्व Phool Dei (फूलदेई) की खुलकर सराहना करते हुए इसे प्रकृति, सकारात्मकता और संस्कृति का अद्भुत संगम बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए इस पर्व को “Monday Motivation” तक करार दिया।
महिंद्रा ने लिखा कि हाल तक वे इस पर्व से अनजान थे, लेकिन जैसे ही उन्होंने इसकी परंपरा के बारे में जाना, वे गहराई से प्रभावित हो गए। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के गांवों में बच्चे पहाड़ों से ताजे फूल तोड़कर घर-घर के दरवाजों पर सजाते हैं और समृद्धि की कामना करते हुए पारंपरिक गीत गाते हैं—“फूल देई, छम्मा देई, देनी द्वार, भर भकार…”। इसके बदले में घर वाले बच्चों को मिठाइयां और उपहार देते हैं, जो इस परंपरा को और भी खास बनाता है।
इस अनोखी परंपरा की तुलना करते हुए उन्होंने Halloween का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जहां हैलोवीन में बच्चे “ट्रिक या ट्रीट” कहकर कुछ पाने की उम्मीद रखते हैं, वहीं फूलदेई में बच्चे पहले देने की भावना से फूल अर्पित करते हैं—यही बात इस पर्व को और अधिक सुंदर और प्रेरणादायक बनाती है।
महिंद्रा ने आगे कहा कि जैसे Holi ने देश और दुनिया में अपनी खास पहचान बनाई है, उसी तरह फूलदेई को भी व्यापक स्तर पर पहचान मिलनी चाहिए। उन्होंने उत्तराखंड के बच्चों को अपनी प्रेरणा बताते हुए इस परंपरा को आगे बढ़ाने में योगदान देने की इच्छा भी जताई।
उनकी इस पोस्ट पर Pushkar Singh Dhami ने प्रतिक्रिया देते हुए आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिंद्रा ने देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं और प्रकृति से जुड़े इस पर्व की भावना को बेहद सुंदर तरीके से दुनिया के सामने रखा है।
इसके जवाब में महिंद्रा ने भी मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्हें उत्तराखंड और फूलदेई के लिए कुछ करने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात होगी।
गौरतलब है कि फूलदेई उत्तराखंड का एक प्रमुख लोक पर्व है, जो चैत्र संक्रांति के अवसर पर मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से बच्चे, खासकर बालिकाएं, सुबह-सुबह फूल इकट्ठा कर घरों के द्वार पर सजाती हैं और खुशहाली की कामना करती हैं। यह पर्व प्रकृति प्रेम, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है।
महिंद्रा की इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर फूलदेई को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सांस्कृतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सराहना से उत्तराखंड की पारंपरिक धरोहर को न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की संभावना और भी मजबूत हो जाती है।
