आतंकी मसूद अजहर पर पाकिस्तान द्वारा घोषित 70 लाख पाकिस्तानी रुपये के इनाम को भारत ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। भारत ने पाकिस्तान की इस नई घोषणा को केवल एक ‘दिखावा’ और जनता को गुमराह करने की एक नाकाम कोशिश करार दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कड़े शब्दों में कहा कि पाकिस्तान की ऐसी खोखली घोषणाएं नई नहीं हैं; अतीत में भी हमने इस तरह के दिखावे देखे हैं। भारत का स्पष्ट रुख है कि पाकिस्तान को इस तरह के प्रचार के बजाय आतंकवाद के खिलाफ वास्तविक और ठोस कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
मसूद अजहर, जो जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का संस्थापक है, भारत के खिलाफ कई बड़े आतंकी हमलों का मुख्य सूत्रधार रहा है। वह 2001 के संसद हमले, 2016 के पठानकोट हमले और 2019 के पुलवामा हमले जैसे भीषण आतंकी कृत्यों का आरोपी है। ऐतिहासिक रूप से, 1999 में कंधार विमान अपहरण (IC-814) के दौरान भारत को आतंकियों की रिहाई के दबाव में अजहर सहित अन्य को छोड़ना पड़ा था, जिसके बाद उसने जैश-ए-मोहम्मद जैसे खतरनाक संगठन की नींव रखी। पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने अपनी ‘रेड बुक’ में अजहर को फिर से भगोड़ा घोषित करते हुए इनाम की राशि को 50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख कर दिया है, जिसे भारत ने केवल एक राजनीतिक स्टंट माना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान की इस अचानक बढ़ाई गई इनाम की घोषणा के पीछे का मुख्य उद्देश्य FATF (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) की आगामी बैठक हो सकती है। पाकिस्तान पहले भी FATF की ‘ग्रे लिस्ट’ का हिस्सा रह चुका है और वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि सुधारने के लिए संघर्ष कर रहा है। अक्टूबर में होने वाली बैठक से पहले, पाकिस्तान दुनिया को यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि वह आतंकी फंडिंग और आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठा रहा है। हालांकि, भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान आतंकी नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए जमीनी स्तर पर काम नहीं करता, तब तक ऐसी घोषणाओं का कोई वैश्विक महत्व नहीं होगा।
