ED का बड़ा एक्शन प्लान: हाई-प्रोफाइल मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में अब महीनों में आएगी सजा, बड़े सियासी दिग्गजों की बढ़ सकती है मुश्किलें – Jantak.com
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ED का बड़ा एक्शन प्लान: हाई-प्रोफाइल मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में अब महीनों में आएगी सजा, बड़े सियासी दिग्गजों की बढ़ सकती है मुश्किलें

मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में तेजी लाने के लिए ED ने कसी कमर

प्रवर्तन निदेशालय (ED) अब मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामलों में कानूनी प्रक्रियाओं को लंबा खींचने वाली रणनीति को खत्म करने की तैयारी में है। एजेंसी के नए मिशन के तहत, अब ऐसे मामलों में तेजी से ट्रायल चलाकर सजा दिलाने पर फोकस किया जाएगा, जो अक्सर बड़े वकीलों के माध्यम से सालों तक लटके रहते हैं। ED डायरेक्टर राहुल नवीन ने सख्त निर्देश दिए हैं कि जो मामले अब तक केवल कागजों तक सीमित थे, उन्हें अब त्वरित न्याय के दायरे में लाया जाए। इस नई रणनीति का सीधा असर देश के कई दिग्गज राजनेताओं और बड़े कॉर्पोरेट घरानों पर पड़ने की संभावना है।

IIM बैंगलोर सम्मेलन में बनी नई रणनीति

हाल ही में IIM बैंगलोर में आयोजित ED के 36वें तिमाही सम्मेलन में एजेंसी ने अपनी कार्यप्रणाली और भविष्य की दिशा तय की। इस दौरान डायरेक्टर राहुल नवीन ने जोनल चीफों को स्पष्ट आदेश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कम से कम 10 ऐसे हाई-प्रोफाइल मामलों की पहचान करें, जिन्हें अगले 6 से 8 महीनों के भीतर अंजाम तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने उन मामलों की मासिक समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं जो 6 महीने से अधिक समय से लंबित हैं, और विशेष रूप से उन मामलों की निगरानी करने को कहा है जो पिछले 10 वर्षों से अटके हुए हैं। इसके अलावा, एजेंसी ने जांच की गोपनीयता बनाए रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है, ताकि संवेदनशील दस्तावेज लीक न हों।

सियासी गलियारों में हलचल और एजेंसी का विस्तार

ED की इस आक्रामक कार्यशैली का असर 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले राजनीतिक परिदृश्य में साफ देखा जा सकता है। नेशनल हेराल्ड मामले में राहुल और सोनिया गांधी, IRCTC घोटाले में लालू यादव का परिवार, दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल, और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जैसे बड़े नाम इस जांच के दायरे में हैं। इस बढ़ते काम के बोझ को संभालने के लिए केंद्र सरकार ने भी कमर कस ली है। 1 जनवरी, 2027 से ED के स्टाफ में 60% की भारी वृद्धि की जाएगी, जिससे स्वीकृत पदों की संख्या 2,029 से बढ़कर 3,256 हो जाएगी। साथ ही, जोनल और फंक्शनल यूनिट्स का विस्तार भी किया जा रहा है ताकि जांच की प्रक्रिया को 4-5 साल से घटाकर महज 18 महीने के भीतर पूरा किया जा सके।