उत्तराखंड में हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है हरेला पर्व, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
उत्तराखंड में आज पारंपरिक लोक पर्व हरेला पूरे राज्य में श्रद्धा, उत्साह और हरियाली के साथ मनाया जा रहा है। सावन मास की शुरुआत के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व पर्यावरण संरक्षण, हरियाली और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने का प्रतीक है। लोग अपने घरों में 10 दिन पहले गेहूं, मक्का, जौं आदि के बीज बोते हैं और आज के दिन हरेला काटकर देवताओं को अर्पित करते हैं।
राज्य के शहरी और ग्रामीण इलाकों में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने इस पर्व में बढ़-चढ़कर भाग लिया। कई स्कूलों, सामाजिक संगठनों और सरकारी कार्यालयों में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए हरेला को उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान बताया और सभी से पौधारोपण कर पर्व को सार्थक बनाने की अपील की।
हरेला पर्व लोगों को यह संदेश देता है कि प्रकृति और पर्यावरण को सहेजना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि प्राकृतिक संतुलन और टिकाऊ भविष्य के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
