Uttarakhand

उत्तराखंड कैबिनेट की दो बड़ी घोषणाएं: धर्मांतरण कानून में आजीवन कारावास का प्रावधान, अग्निवीरों को आरक्षण

उत्तराखंड सरकार ने जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता कानून को और सख्त बना दिया है। अब दोषी पाए जाने पर सजा 14 साल से बढ़ाकर आजीवन कारावास तक हो सकती है और जुर्माना ₹50,000 से बढ़ाकर ₹10 लाख कर दिया गया है। साथ ही, धर्म परिवर्तन से अर्जित संपत्ति कुर्क करने, डिजिटल माध्यम से धर्म परिवर्तन का प्रलोभन देने और विदेशी फंड लेने पर कड़ी सजा का प्रावधान जोड़ा गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 26 प्रस्तावों को मंजूरी मिली। प्रमुख फैसलों में शामिल हैं:

1. अग्निवीरों को सरकारी नौकरी में आरक्षण

सेना से सेवा मुक्त होने वाले अग्निवीरों को समूह-ग की सीधी भर्ती में वर्दीधारी पदों पर 10% क्षैतिज आरक्षण मिलेगा। इनमें पुलिस, पीएसी, अग्निशमन, वन विभाग, कारागार, आबकारी और प्रवर्तन विभाग के पद शामिल हैं। अग्निवीरों को शारीरिक दक्षता परीक्षा से छूट और सेवा अवधि के बराबर अधिकतम आयु सीमा में राहत दी जाएगी। 2026 तक करीब 850 अग्निवीर इस आरक्षण का लाभ उठा सकेंगे।

2. औद्योगिक क्षेत्रों में सेवा सेक्टर को भी भूमि

राज्य के 30 औद्योगिक क्षेत्रों में अब कुल क्षेत्रफल का 5% हिस्सा सेवा क्षेत्र के लिए दिया जाएगा। इससे बायोटेक, आईटी, ऑटोमोबाइल सर्विस सेंटर, ईवी चार्जिंग स्टेशन, होटल-रेस्टोरेंट, और कौशल विकास केंद्र स्थापित करने में मदद मिलेगी।

3. आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए समिति

विभागों में संविदा व आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया तय करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी।

4. अन्य प्रमुख फैसले

  • लखवाड़ जल विद्युत परियोजना के प्रभावितों को नैनबाग सर्किल रेट पर मुआवजा।

  • परियोजना विकास एवं निर्माण निगम का पुनर्गठन, 91 प्रतिनियुक्ति और 4 संवर्गीय पद सृजित।

  • सहकारिता विभाग के लिए उत्तराखंड सहकारी संस्थागत सेवामंडल का गठन।

  • उच्चतर न्यायिक सेवा, पंचायतीराज, वित्त सेवा, पशुपालन और ग्राम्य विकास नियमावली में संशोधन।

  • विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (एसटीआई) नीति 2025 को मंजूरी।

  • बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में उपाध्यक्ष का एक अतिरिक्त पद।

  • नगर निकायों में ओबीसी सर्वेक्षण के लिए पूर्व जस्टिस बी.एस. वर्मा की अध्यक्षता में आयोग का गठन।

इन फैसलों से राज्य में धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा, पूर्व सैनिकों के लिए अवसर, औद्योगिक विकास और प्रशासनिक सुधार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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