घोटाला: ऋषिकेश एम्स में 2.73 करोड़ की हेराफेरी, पूर्व निदेशक सहित 3 पर केस दर्ज
उत्तराखंड ऋषिकेश से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ऋषिकेश स्थित एम्स अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग की 16-बेड वाली कोरोनरी केयर यूनिट के निर्माण और उपकरण खरीद में करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है।
सीबीआई जांच में पता चला कि एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. रविकांत, तत्कालीन एडिशनल प्रोफेसर रेडिएशन ओंकोलॉजी डॉ. राजेश पसरीचा, और पूर्व स्टोर कीपर रूपसिंह ने मिलकर 2.73 करोड़ रुपये का गबन किया। आरोप है कि टेंडर जारी करने के बाद उपकरणों की आपूर्ति अधूरी हुई और जो उपकरण इंस्टॉल किए गए, उनकी गुणवत्ता भी खराब थी। परिणामस्वरूप 8 करोड़ से अधिक खर्च होने के बावजूद मरीजों को लाभ नहीं मिला।
जाँच में यह भी सामने आया कि 2017 में जारी टेंडर के तहत दिल्ली की कंपनी एमएस प्रो मेडिक डिवाइसेस को काम दिया गया था। हालांकि, 2019-20 में आपूर्ति दो किस्तों में हुई और अधिकांश सामान बेकार या स्पेसिफिकेशन के अनुसार नहीं था। टेंडर फाइल तक गायब पाई गई।
सीबीआई और एम्स अधिकारियों ने 26 मार्च को संयुक्त जांच में पाया कि कई उपकरण गायब थे, कई बेकार और कुछ असंगत थे। इस मामले में डॉ. रविकांत, डॉ. राजेश पसरीचा और रूपसिंह समेत अज्ञात सरकारी कर्मियों और निजी लोगों के खिलाफ 26 सितंबर को FIR दर्ज की गई।
घोटाले में शामिल ठेकेदार पुनीत शर्मा का अब निधन हो चुका है। जांच में सामने आया कि उन्होंने एम्स को धोखाधड़ी के तहत अनुचित लाभ पहुंचाया।
यह मामला राज्य स्वास्थ्य तंत्र और सार्वजनिक धन के संरक्षण पर गंभीर सवाल उठाता है।
