25 साल में 20 गुनी बढ़ी उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था, विकास में छत्तीसगढ़ और झारखंड को पीछे छोड़ा
नौ नवंबर 2000 को लंबे संघर्ष, जनआंदोलनों और बलिदानों के बाद उत्तराखंड भारत का 27वां राज्य बना था। तब किसी ने नहीं सोचा था कि पहाड़ों का यह छोटा-सा राज्य आने वाले वर्षों में देश के सबसे तेज़ी से विकसित होने वाले राज्यों में शामिल हो जाएगा। अब जब उत्तराखंड अपने गठन के 25 वर्ष पूरे कर चुका है, तो यह बात गर्व से कही जा सकती है कि राज्य ने न सिर्फ आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है, बल्कि आर्थिक विकास के मामले में अपने समकक्ष राज्यों—छत्तीसगढ़ और झारखंड—को भी पीछे छोड़ दिया है।
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था: 15 हजार करोड़ से 3.78 लाख करोड़ तक
वर्ष 2001-02 में उत्तराखंड की कुल अर्थव्यवस्था मात्र ₹15,826 करोड़ रुपये की थी। उस समय राज्य की आबादी सीमित थी और औद्योगिक ढांचा बहुत कमजोर।
लेकिन 2025 में राज्य की अर्थव्यवस्था बढ़कर ₹3.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है — यानी 20 गुना से अधिक वृद्धि।
राज्य की यह तेज़ वृद्धि दर न सिर्फ उत्तराखंड की नीतिगत स्थिरता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि पहाड़ी क्षेत्र में संसाधन सीमित होने के बावजूद मानव पूंजी और पर्यटन आधारित विकास मॉडल कितना प्रभावी हो सकता है।
छत्तीसगढ़ और झारखंड से तुलना
| राज्य | गठन वर्ष | प्रारंभिक अर्थव्यवस्था (2001-02) | वर्तमान अर्थव्यवस्था (2024-25 अनुमानित) | वृद्धि का अनुपात |
|---|---|---|---|---|
| उत्तराखंड | 2000 | ₹15,826 करोड़ | ₹3.78 लाख करोड़ | 20 गुना |
| छत्तीसगढ़ | 2000 | ₹28,000 करोड़ | ₹4.45 लाख करोड़ | 15 गुना |
| झारखंड | 2000 | ₹27,000 करोड़ | ₹4.10 लाख करोड़ | 14 गुना |
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का आकार छत्तीसगढ़ और झारखंड से थोड़ा छोटा है, लेकिन विकास दर (Growth Rate) और प्रति व्यक्ति आय के मामले में यह दोनों राज्यों से आगे निकल चुका है।
प्रति व्यक्ति आय में भी बड़ी छलांग
वर्ष 2000 में उत्तराखंड की प्रति व्यक्ति आय मात्र ₹19,000 प्रति वर्ष थी।
आज यह बढ़कर ₹1.47 लाख रुपये प्रति व्यक्ति से अधिक हो चुकी है — यानी लगभग 7.5 गुना वृद्धि।
वहीं, छत्तीसगढ़ की प्रति व्यक्ति आय लगभग ₹1.25 लाख और झारखंड की ₹1.10 लाख है।
इससे साफ है कि उत्तराखंड की आर्थिक प्रगति तेज़ और संतुलित दोनों रही है, खासतौर पर शिक्षा, पर्यटन, उद्योग और सेवा क्षेत्र के विकास ने इसमें अहम भूमिका निभाई है।
बजट और विकास योजनाओं में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
वर्ष 2002-03 में जब तत्कालीन मुख्यमंत्री एन.डी. तिवारी ने राज्य का पहला निर्वाचित बजट ₹5,880 करोड़ का पेश किया था, तब उसे बड़ी उपलब्धि माना गया था।
आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने 2025 में ₹1 लाख करोड़ से अधिक का बजट पेश करके नया रिकॉर्ड बनाया है।
इस बजट का बड़ा हिस्सा अब इन्फ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार सृजन पर केंद्रित है — जो राज्य को आने वाले दशक में एक सस्टेनेबल इकॉनमी मॉडल की दिशा में ले जा रहा है।
राष्ट्रीय रैंकिंग में भी शानदार प्रदर्शन
नीति आयोग की सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDG) इंडेक्स रिपोर्ट 2023-24 में उत्तराखंड ने देशभर में केरल के साथ पहला स्थान साझा किया है।
इस रिपोर्ट में शिक्षा, स्वास्थ्य, लैंगिक समानता, स्वच्छता, और पर्यावरण संरक्षण जैसे 17 मानकों पर राज्यों को आंका गया है।
यह उपलब्धि दर्शाती है कि उत्तराखंड ने सिर्फ आर्थिक मोर्चे पर नहीं, बल्कि मानव विकास और सामाजिक संतुलन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय काम किया है।
पहाड़ी राज्य से विकसित राज्य की ओर
उत्तराखंड ने इन 25 वर्षों में पर्यटन, औद्योगिक निवेश, शिक्षा, और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति की है।
देहरादून, हरिद्वार और उधमसिंह नगर जैसे जिलों ने औद्योगिक केंद्र के रूप में पहचान बनाई है, जबकि चारधाम और एडवेंचर टूरिज्म ने राज्य को आर्थिक रूप से सशक्त किया है।
राज्य की इस रफ्तार ने उसे ‘मॉडल हिल स्टेट’ बना दिया है — जहां विकास और पर्यावरण का संतुलन दोनों साथ चल रहे हैं।
निष्कर्ष
उत्तराखंड ने 25 वर्षों में यह साबित कर दिया है कि अगर नीयत साफ हो और नीतियां दूरदर्शी, तो सीमित संसाधन भी विकास की बड़ी कहानी लिख सकते हैं।
आज जब राज्य 20 गुना आर्थिक वृद्धि के साथ छत्तीसगढ़ और झारखंड को पीछे छोड़ आगे बढ़ रहा है, तो यह सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि संकल्प, परिश्रम और दूरदर्शिता की कहानी है।
