Uttarakhand

किसान दूर, विभाग की तगड़ी कमाई—माल्टा 10 रुपये में खरीदा, 40 रुपये किलो में बेचा

उत्तराखंड औद्यानिक परिषद ने किसानों से माल्टा 10 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदकर महोत्सव में 40 रुपये प्रति किलो में बेचा। इस अंतर के कारण कई किसान खुद को नुकसान में महसूस कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर बढ़ती मांग देखकर उन्हें आने वाले समय में बेहतर दाम मिलने की उम्मीद भी जगी है। माल्टा लंबे समय से उत्तराखंड की पहचान और लोकपरंपरा का हिस्सा रहा है और पहाड़ों में इसकी खास पहचान है। फिर भी दूरस्थ क्षेत्रों के किसानों को अभी तक नींबू वर्गीय फलों का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा था। इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने पहली बार राजकीय उद्यान सर्किट हाउस गढ़ीकैंट में माल्टा महोत्सव का आयोजन कर ब्रांडिंग और विपणन का नया प्रयास किया।

महोत्सव में किसानों से खरीदे गए सी-ग्रेड माल्टे को 40 रुपये प्रति किलो बेचा गया। वहीं गलगल और चकोतरा किसानों से सात रुपये प्रति किलो पर खरीदे गए और 15 रुपये प्रति किलो बेचे गए। किसानों का कहना है कि इससे होने वाली राशि का लाभ सीधे उन्हें नहीं बल्कि परिषद को मिला।

पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट के दुर्गा राम का कहना है कि भले ही न्यूनतम समर्थन मूल्य 10 रुपये प्रति किलो घोषित है, लेकिन उनके क्षेत्र में खरीद केंद्र नहीं हैं, इसलिए बिक्री मुश्किल है। बागेश्वर के रोशन सिंह बताते हैं कि विभाग ने उनसे 10 रुपये प्रति किलो की दर से माल्टा खरीदा।

परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेंद्र यादव के अनुसार जो माल्टा खुले बाजार में नहीं बिक पाता, उस सी-ग्रेड फल को 10 रुपये प्रति किलो पर खेतों से खरीदा गया। वहीं कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि बाजार में माल्टे की भारी मांग है और किसान सीधे 40 रुपये प्रति किलो के भाव पर भी इसे बेच सकते हैं। उनके अनुसार कुछ किसानों ने महोत्सव में सीधे बिक्री भी की और जल्द ही दिल्ली में भी माल्टा महोत्सव आयोजित किया जाएगा।

महोत्सव में विभिन्न जिलों से 253 क्विंटल माल्टा, 29 क्विंटल गलगल, 12 क्विंटल कागजी नींबू और 4.50 क्विंटल चकोतरा लाया गया। इसमें से 20 क्विंटल माल्टा, सात क्विंटल गलगल, 35 किलो कागजी नींबू और 16 किलो चकोतरा बिका, जबकि 28 क्विंटल फुटकर बिक्री में गया और 271 क्विंटल संरक्षण इकाई को भेजा गया।