Uttarakhand

अंकिता भंडारी केस: इंसाफ पूरा हुआ या सच छुपा रह गया? क्यों फिर उबाल पर उत्तराखंड

उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। 18 सितंबर 2022 को अंकिता की हत्या हुई थी और 24 सितंबर को उसका शव बरामद हुआ था। करीब तीन साल चार महीने बाद मई 2025 में कोर्ट ने बीजेपी नेता के बेटे पुलकित आर्य, अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बावजूद अब सवाल उठ रहा है कि अगर न्याय मिल चुका था, तो जनता दोबारा सड़कों पर क्यों उतरी?

यह मामला फिर तब गरमाया जब 29 दिसंबर को उर्मिला सनावर नाम की महिला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। उसने दावा किया कि अंकिता की हत्या इसलिए की गई क्योंकि उसने एक वीवीआईपी नेता को रिजॉर्ट में “एक्स्ट्रा सर्विस” देने से मना कर दिया था। इसके बाद उर्मिला ने एक ऑडियो भी जारी किया, जिसमें एक नेता की आवाज होने का दावा किया गया और उसी वीवीआईपी को हत्या का जिम्मेदार बताया गया।

इस ऑडियो-वीडियो के सामने आने के बाद कथित वीवीआईपी नेता दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे, जहां 7 जनवरी को उनके नाम का सार्वजनिक उल्लेख करने पर रोक लगा दी गई। उर्मिला सनावर खुद को एक्ट्रेस बताती हैं और हरिद्वार से बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की दूसरी पत्नी होने का दावा करती हैं। जारी ऑडियो में दूसरी आवाज सुरेश राठौर की बताई जा रही है।

5 जनवरी 2026 को उर्मिला ने एक और पोस्ट कर कहा कि यह ऑडियो 1 नवंबर 2025 को रिकॉर्ड किया गया था और उन्होंने आशंका जताई कि उनका मोबाइल गायब किया जा सकता है।

विवाद बढ़ने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि जिस वीवीआईपी नेता पर आरोप लग रहे हैं, वह 10 से 20 सितंबर 2022 के बीच उत्तराखंड में मौजूद ही नहीं थे। सरकार और पुलिस की सफाई के बावजूद वीवीआईपी की गिरफ्तारी और सीबीआई जांच की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया है।

प्रदर्शनकारियों ने 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का ऐलान किया है, जिसे अंकिता भंडारी के पिता का भी समर्थन मिला है।