ऋषिकेश: 49 करोड़ का जानकी सेतु पांच साल में जर्जर, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल
टिहरी और पौड़ी जनपद को आपस में जोड़ने वाला जानकी सेतु अब अपनी बदहाली को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है। करोड़ों रुपये की लागत से बना यह पुल महज़ पांच साल में ही जर्जर हालत में पहुंचता दिखाई दे रहा है। पुल की सतह पर जगह-जगह दरारें उभर आई हैं और कई स्थानों पर गड्ढे बन गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भारी नाराज़गी है।
लोक निर्माण विभाग नरेंद्रनगर द्वारा मुनि की रेती से स्वर्गाश्रम वेद निकेतन को जोड़ने के लिए लगभग 346 मीटर लंबे इस पुल का निर्माण किया गया था। करीब 49 करोड़ रुपये की लागत से बने इस सेतु को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है—बीच का हिस्सा पैदल यात्रियों के लिए, जबकि दोनों ओर के हिस्से दोपहिया वाहनों की आवाजाही के लिए निर्धारित हैं।
इस पुल का लोकार्पण 20 नवंबर 2020 को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा किया गया था। उस समय इसे क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि माना गया था, लेकिन पांच साल के भीतर ही पुल की हालत खराब होना निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय नागरिकों सुमित रावत, दीपक नेगी और सत्यपाल रावत का कहना है कि पुल पर लगाए गए लोहे के एंगल कई स्थानों से गायब हो चुके हैं, जिससे सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा पुल के प्लेटफॉर्म की नियमित सफाई भी नहीं की जा रही है, जिससे गंदगी और टूट-फूट और अधिक बढ़ती जा रही है।
पुल को आकर्षक बनाने के लिए लाखों रुपये खर्च कर चीनी लाइटों से सजाया गया था, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते सौंदर्यीकरण का यह प्रयास भी अब बेमानी साबित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं की गई, तो भविष्य में यह पुल किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है।
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग नरेंद्रनगर के सहायक अभियंता अश्वनी यादव ने बताया कि मामला विभाग के संज्ञान में है। हाल ही में विभागीय कर्मचारियों के साथ पुल का निरीक्षण किया गया है और प्लेटफॉर्म पर बने गड्ढों को जल्द भरने की कार्रवाई की जाएगी।
