Uttarakhand

उत्तराखंड: बिजली दर बढ़ोतरी पर हंगामा… उद्योग और किसान बोले अब और बोझ नहीं सहेंगे

प्रस्तावित बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर उत्तराखंड में उपभोक्ताओं, उद्योगपतियों और किसानों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। शुक्रवार को आयोजित जनसुनवाई में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और आयोग के समक्ष अपनी आपत्तियां रखीं।

उपभोक्ताओं ने सवाल उठाया कि जहां उत्तर प्रदेश में पिछले कई वर्षों से बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं हुई, वहीं उत्तराखंड में हर साल टैरिफ संशोधन क्यों किया जा रहा है। इस पर ऊर्जा निगम की ओर से कहा गया कि यूपी में राज्य सरकार सब्सिडी देती है, जबकि उत्तराखंड में ऐसा प्रावधान नहीं है।

उद्योग प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि बढ़ी हुई दरों के कारण प्रदेश के 76 प्रतिशत उद्योग प्रभावित हो सकते हैं। उनका कहना था कि सरकारी उपक्रमों से बकाया वसूली के बजाय उद्योगों और आम उपभोक्ताओं पर बोझ डाला जा रहा है। इंडस्ट्री संगठनों ने मांग की कि प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए टैरिफ यूपी और हिमाचल से कम होना चाहिए, अन्यथा उद्योग पलायन बढ़ेगा और हजारों लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी।

स्मार्ट मीटर को लेकर भी असंतोष सामने आया। कई उपभोक्ताओं ने दावा किया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिल लगभग दोगुना हो गया है। ऊर्जा निगम ने स्पष्ट किया कि यदि किसी को गड़बड़ी की आशंका है तो चेक मीटर लगाकर जांच की जाएगी।

कृषि और लघु उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने फिक्स चार्ज और नई श्रेणियों का विरोध किया। पॉलीहाउस और मशरूम उत्पादकों का कहना था कि फिक्स चार्ज के कारण उनका व्यवसाय बंदी के कगार पर है। किसानों ने भी साफ कहा कि वे एक रुपये प्रति यूनिट से अधिक दर स्वीकार नहीं करेंगे और स्मार्ट मीटर का गांवों में विरोध जारी रहेगा।

सुनवाई के अंत में आयोग ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आश्वासन दिया कि अंतिम फैसला उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।