यमुना बेसिन के लिए नए युग की शुरुआत: किशाऊ प्रोजेक्ट पर बनी सहमति
नई दिल्ली में मंगलवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब दिल्ली (केंद्र शासित प्रदेश) सहित पांच अन्य राज्यों ने लंबे समय से लंबित ‘किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना’ के लिए एक बड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की गरिमामयी उपस्थिति में इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया। इस प्रोजेक्ट की परिकल्पना मूल रूप से 1940 में की गई थी, और अब दशकों बाद इस पर सहमति बनना यमुना नदी के पुनरुद्धार की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
किशाऊ प्रोजेक्ट: तकनीक और संसाधनों का संगम
यह महत्वाकांक्षी परियोजना यमुना की प्रमुख सहायक नदी ‘टोंस’ पर विकसित की जाएगी, जो हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर प्रवाहित होती है। समझौते के तहत टोंस नदी पर लगभग 232 मीटर ऊंचा एक विशाल कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनाया जाएगा। इस परियोजना की क्षमता और इसके संभावित लाभों का विवरण इस प्रकार है:
जल विवादों के समाधान का नया मॉडल
इस अवसर पर अमित शाह ने कहा कि 2018 से 2026 का कालखंड भारत के जल इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने रेखांकित किया कि इस दौरान कश्मीर से लेकर उत्तर प्रदेश तक के कई जटिल जल विवादों को कुशलतापूर्वक सुलझा लिया गया है। शाह ने लखवार बहुउद्देश्यीय परियोजना, शाहपुर कंडी डैम, रेणुकाजी मल्टीपर्पस डैम और केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट जैसे सफल उदाहरणों का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे जोनल काउंसिल और जल शक्ति मंत्रालय के समन्वय से राज्यों के बीच सहयोग की नई संस्कृति विकसित हुई है। किशाऊ प्रोजेक्ट का सफल क्रियान्वयन उत्तर भारत की जल सुरक्षा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा।
