दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय गैंगस्टरों का नेटवर्क अब केवल स्थानीय गलियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ संगठित अपराध का जाल बन चुका है। पुलिस जांच के दौरान सामने आया है कि गैंगस्टरों का एक बड़ा हिस्सा अब देश की सीमाओं के बाहर बैठकर ‘रिमोट कंट्रोल’ के जरिए अपराधों का संचालन कर रहा है। हाल ही में सामने आए 200 करोड़ रुपये के रंगदारी (Extortion) के मामले ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है। यह खुलासा बताता है कि कैसे अपराधी विदेश में बैठकर भारत में अपनी दहशत कायम रखे हुए हैं और एक विशाल साम्राज्य चला रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इन अपराधियों को सटीक ‘टारगेट’ चुनने के लिए एक विस्तृत सूचना तंत्र (Information Network) की मदद मिलती है। इस नेटवर्क में स्थानीय स्तर पर सक्रिय बिल्डर, प्रॉपर्टी डीलर, सट्टा ऑपरेटर, और हवाला कारोबारी शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ भ्रष्ट पुलिसकर्मी और कथित वकील भी इन गैंग्स को इनपुट मुहैया कराने में मदद करते हैं। अपराधी मुख्य रूप से उन लोगों को निशाना बनाते हैं जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं, जैसे कि ज्वेलर्स, कार डीलर, ट्रांसपोर्टर, और बड़े उद्योगपति। वसूली गई इस भारी-भरकम रकम को वापस विदेश भेजने के लिए Hawala और USDT (Cryptocurrency) जैसे आधुनिक माध्यमों का उपयोग किया जाता है, जिससे कानून की आंखों में धूल झोंकना आसान हो जाता है।
अपराधियों का यह पूरा मॉडल न केवल वसूली पर, बल्कि उसके पुनर्निवेश (Re-investment) पर भी टिका है। रंगदारी से प्राप्त धन का उपयोग जेल में बंद गैंगस्टरों की सुविधाओं, हथियारों की खरीद, और विदेशों में उनके विलासितापूर्ण जीवन के लिए किया जाता है। इसके अलावा, यह पैसा होटल, बार, गोल्ड बिजनेस और अवैध शराब जैसे धंधों में भी लगाया जाता है। यदि कोई पीड़ित पैसा देने में आनाकानी करता है, तो गैंगस्टर्स अपने गुर्गों के जरिए फायरिंग करवाकर दहशत फैलाते हैं। वर्तमान में, पुलिस सिविल लाइंस के मामले सहित कई अन्य संदिग्ध पहलुओं की जांच कर रही है, जिसमें पारिवारिक विवादों और विदेशी मोबाइल नेटवर्क के इस्तेमाल की संभावनाओं को भी खंगाला जा रहा है। इन गिरोहों के तार पंजाब, राजस्थान और हरियाणा के बड़े अपराधी समूहों से भी जुड़े हुए हैं, जो इस खतरे को और अधिक गंभीर बनाते हैं।
