ऑनलाइन सट्टेबाजी का खतरनाक जाल: 10 लाख करोड़ का अवैध बाजार और करोड़ों भारतीयों की लत; इन्फ्लुएंसर्स भी शामिल

भारत में ऑनलाइन सट्टेबाजी का अवैध बाजार 10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। प्रतिबंधों के बावजूद, रोजाना करोड़ों लोग इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं और सैकड़ों इन्फ्लुएंसर्स भी इसके प्रचार में शामिल हैं।

ऑनलाइन सट्टेबाजी का खतरनाक जाल: 10 लाख करोड़ का अवैध बाजार और करोड़ों भारतीयों की लत; इन्फ्लुएंसर्स भी शामिल

ऑनलाइन सट्टेबाजी का बढ़ता साम्राज्य और अवैध कारोबार की भयावहता

भारत में ऑनलाइन सट्टेबाजी का अवैध कारोबार एक बेहद चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, देश में इस अवैध बाजार का आकार लगभग 10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। कानून के कड़े नियमों के बावजूद, यह अवैध गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मात्र 15 अवैध ऑनलाइन सट्टा प्लेटफॉर्म्स पर 540 करोड़ से अधिक विजिट दर्ज की गई हैं, जिसका अर्थ है कि औसतन प्रतिदिन लगभग 1.48 करोड़ लोग इन प्लेटफॉर्म्स का उपयोग कर रहे हैं। कानून की पकड़ से बचने के लिए ये प्लेटफॉर्म विदेशी सर्वर, नए डोमेन, टेलीग्राम ग्रुप्स और ‘म्यूल बैंक खातों’ (Mule Bank Accounts) का सहारा ले रहे हैं ताकि उनकी पहचान और संचालन को गुप्त रखा जा सके।

कानूनी सख्ती और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का संदिग्ध रोल

सट्टेबाजी के इस बढ़ते चलन में सोशल मीडिया का भी बड़ा योगदान देखा जा रहा है। जांच में सामने आया है कि 854 इन्फ्लुएंसर्स इन अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म्स के प्रचार-प्रसार में सक्रिय रूप से शामिल हैं। हालांकि, सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। संसद द्वारा 2025 में ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून पारित किया गया है, जो 1 मई 2026 से प्रभावी होगा। यह कानून न केवल किस्मत (Luck) पर आधारित खेलों, बल्कि कौशल (Skill) पर आधारित सट्टेबाजी, उनके प्रमोशन और भुगतान सुविधाओं पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाएगा। इसके बावजूद, सरोगेट विज्ञापन और निजी मैसेजिंग ग्रुप्स के जरिए यूजर्स को इन अवैध मंचों की ओर धकेला जा रहा है।

लत का मनोवैज्ञानिक जाल और गहराता सामाजिक संकट

सट्टेबाजी की यह लत केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव व्यापक सामाजिक और आर्थिक संकट के रूप में सामने आ रहा है। वैश्विक स्तर पर लगभग 8 करोड़ वयस्क सट्टेबाजी की लत से जूझ रहे हैं, और एक यूजर के साथ औसतन 6 अन्य लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 60% यूजर्स अपना पैसा गंवा देते हैं, जिससे उनके परिवार की शिक्षा और बुनियादी जरूरतों पर बुरा असर पड़ता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ये प्लेटफॉर्म्स विशेष रूप से डिजाइन किए गए एल्गोरिदम, भ्रामक डिजाइन और बॉट्स का उपयोग करते हैं ताकि यूजर्स को जीत का भ्रम देकर लत लगाई जा सके। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, लत के तीन प्रमुख संकेत हैं: नियंत्रण खो देना, सट्टेबाजी को जीवन में प्राथमिकता देना और भारी नुकसान के बावजूद खेलना जारी रखना। साइबर और डेटा प्राइवेसी एक्सपर्ट्स का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी और इन प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करना अब अनिवार्य हो गया है।