केदारनाथ धाम मार्ग पर भूस्खलन का बड़ा खतरा: 600 से अधिक पशु और सैकड़ों तीर्थयात्रियों को SDRF ने बचाया

केदारनाथ धाम मार्ग पर भूस्खलन के कारण बड़ा संकट खड़ा हो गया; SDRF और स्थानीय प्रशासन ने कई घंटों तक बचाव कार्य किया, जिसमें सैकड़ों तीर्थयात्रियों और 600 से अधिक पशुओं को सुरक्षित निकाला गया।

केदारनाथ धाम मार्ग पर भूस्खलन का बड़ा खतरा: 600 से अधिक पशु और सैकड़ों तीर्थयात्रियों को SDRF ने बचाया

उत्तराखंड के केदारनाथ धाम का पवित्र पैदल मार्ग रविवार से ही भूस्खलन की चपेट में आ गया, जिससे श्रद्धालुओं का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। रुद्रप्रयाग पुलिस के अनुसार, यह घटना गौरीकुंड से लगभग 2.5 किलोमीटर ऊपर चीरवासा हेलीपोर्ट के पास की पहाड़ी पर हुई। शाम तक मौसम की खराब स्थिति और लगातार पत्थरों के गिरने के कारण मार्ग पर भारी खतरा मंडरा रहा था। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और उन्हें विभिन्न स्थानों पर सुरक्षित रुकवाया, ताकि किसी भी तरह की अनहोनी को टाड़ा जा सके।

जैसे ही सोमवार सुबह मौसम में सुधार हुआ और पत्थरों का गिरना रुका, बचाव कार्य तेजी से शुरू किया गया। SDRF, DDRF के जवानों और स्थानीय प्रशासन की टीमों ने मिलकर केदारनाथ धाम की ओर से लौट रहे बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों को चीरवासा के समीप से सुरक्षित रूप से रास्ता पार कराया। इस बचाव अभियान की एक बड़ी सफलता यह रही कि मार्ग बाधित होने के कारण फंसे हुए करीब 600 से 700 घोड़े-खच्चरों को भी सफलतापूर्वक और सुरक्षित तरीके से निकाला गया। यह संपूर्ण ऑपरेशन दर्शाता है कि आपदा प्रबंधन टीमें कितनी कुशलता और तत्परता से काम करती हैं।

फिलहाल, केदारनाथ पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं की निर्बाध और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए SDRF, DDRF, YMF (Youth Movement Force), आपदा मित्र और पुलिस बल की टीमें लगातार मौके पर तैनात हैं। बचाव टीमों के अलावा, लोक निर्माण विभाग (PWD) ने भी तुरंत मोर्चा संभाल लिया है। विभाग की टीमें मार्ग से गिरे हुए भारी मलबे और पत्थरों को हटाने का कार्य कर रही हैं, ताकि मार्ग का सुधारीकरण हो सके। अधिकारियों ने बताया है कि वर्तमान में स्थिति सामान्य बनाए रखने के लिए सभी संबंधित विभाग हाई अलर्ट पर हैं और निरंतर निगरानी बनाए हुए हैं।