रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने देश की सुरक्षा क्षमताओं को नई ऊँचाई देते हुए एक क्रांतिकारी सफलता हासिल की है। डॉ. मीना मिश्रा के नेतृत्व में DRDO की टीम ने स्वदेशी गैलियम नाइट्राइड (GaN) चिप तकनीक विकसित की है। यह उपलब्धि भारत को अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाती है। यह तकनीक न केवल रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों (EW systems) को अभूतपूर्व शक्ति देगी, बल्कि मिसाइलों, लड़ाकू विमानों और ड्रोन जैसे महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म्स को भी नई जान फूँकने की क्षमता रखती है।
यह सफलता DRDO की सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (SSPL) की डायरेक्टर, डॉ. मीना मिश्रा की गहन विशेषज्ञता और अथक प्रयासों का परिणाम है। GaN एक उन्नत अर्धचालक सामग्री है जो पारंपरिक सिलिकॉन चिप्स की सीमाओं को पार करती है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत में विकसित इस चिप का आकार मात्र 3.5 मिलीमीटर गुणा 3 मिलीमीटर है, लेकिन यह 30 वॉट तक की शक्ति संभाल सकती है और इसकी गति सिलिकॉन की तुलना में 300 गुना तक अधिक है। इसका मतलब है कि यह चिप बेहद कम जगह में अत्यधिक प्रोसेसिंग पावर और ऊर्जा दक्षता प्रदान करती है। यह तकनीक विशेष रूप से ऐसे उपकरणों के लिए महत्वपूर्ण है जिन्हें हाई-फ्रीक्वेंसी और हाई-पावर सिग्नल प्रोसेसिंग की आवश्यकता होती है।
इस स्वदेशी GaN तकनीक का प्रभाव केवल रडार तक सीमित नहीं रहेगा। रडार सिस्टम में इसका उपयोग सिग्नल भेजने और प्राप्त करने वाले मॉड्यूल्स को उन्नत करेगा, जिससे एंटीना को बिना घुमाए भी नियंत्रित और सटीक कवरेज मिल सकेगा। इसके अलावा, इस चिप का इस्तेमाल आधुनिक युद्धपोतों, जमीन पर तैनात वायु रक्षा प्रणालियों और लड़ाकू विमानों में किया जा सकता है। सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ यह है कि पहले इस उन्नत GaN उपकरण कई देशों से आयात किए जाते थे, और अक्सर इन पर निर्यात नियंत्रण भी लगे रहते थे। अब भारत में ही इसके डिजाइन से लेकर निर्माण तक की पूरी क्षमता तैयार हो गई है, जो देश की रक्षा स्वायत्तता (Defence Autonomy) के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी। SSPL ने 150 वॉट क्षमता वाले ट्रांजिस्टर और 40 वॉट क्षमता वाले माइक्रोवेव इंटीग्रेटेड सर्किट विकसित करके इस आत्मनिर्भरता के सपने को साकार किया है।
