गुड़गांव में महिला बाइकर को कार से मारी टक्कर: मौत को छूकर वापस लौटीं शिवानी
गुड़गांव की पॉश गोल्फ कोर्स रोड पर हुई एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना ने सड़क सुरक्षा और महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिवानी चौहान, जिन्हें प्यार से सिया कहा जाता है, एक तेज रफ्तार कार की चपेट में आ गईं। सिया ने सोशल मीडिया पर साझा किए अपने वीडियो में बताया कि अगर उन्होंने सही राइडिंग गियर्स, जैसे हेलमेट, ग्लव्स और सुरक्षात्मक जूते न पहने होते, तो परिणाम बेहद घातक हो सकता था। उन्होंने आरोपी चालक के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया कि उसे पता नहीं था कि बाइक कोई महिला चला रही है। सिया के अनुसार, टक्कर के बाद वह सड़क पर काफी दूर तक घिसटती चली गईं और महज 2-3 सेकंड का अंतर उनकी जान ले सकता था।
‘यह महज हादसा नहीं, जान लेने की साजिश है’: पीड़ित परिवार का आक्रोश
इस घटना के बाद शिवानी के परिवार में भारी आक्रोश है। उनके पिता, रोशन चौहान ने पुलिस के समक्ष बयान दर्ज कराते हुए इसे एक सामान्य सड़क दुर्घटना मानने से इनकार कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा,
“यह कोई हादसा नहीं, बल्कि मेरी बेटी की हत्या की कोशिश थी।”
परिवार अब इस मामले में कड़ी कानूनी लड़ाई लड़ने और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए पूरी तरह तैयार है। मामले में पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है और आरोपी चालक को राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी जिम और प्रॉपर्टी के कारोबार से जुड़ा बताया जा रहा है, और पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह जानबूझकर की गई हरकत थी।
सड़क पर असुरक्षित हैं महिला राइडर्स और साइकलिस्ट: दिल्ली-NCR से आई डराने वाली कहानियां
गुड़गांव की इस घटना ने दिल्ली-एनसीआर की अन्य महिला राइडर्स के बीच भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सहर हाशमी, जो दिल्ली से कश्मीर तक की यात्रा कर चुकी हैं, ने बताया कि सड़कों पर महिलाओं को अक्सर उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। बाइकर सीमा डोरा का कहना है कि जैसे ही महिला राइडर्स अपना हेलमेट उतारती हैं या उनकी पहचान उजागर होती है, पुरुष चालक उन्हें जानबूझकर डराने, डिवाइडर के करीब धकेलने या असुरक्षित तरीके से ओवरटेक करने की कोशिश करने लगते हैं। वहीं, महिला साइकलिस्ट नेहा रायजादा ने भी सड़क पर सुरक्षा के अभाव और गाड़ियों द्वारा बेहद करीब से गुजरने की समस्या को उजागर किया है, जिससे संतुलन बिगड़ सकता है। इन सभी महिला राइडर्स का मानना है कि सड़क पर सुरक्षा के लिए बेहतर निगरानी, सख्त कानूनी कार्रवाई और समाज में संवेदनशीलता की सख्त जरूरत है।
