UPI ट्रांजैक्शन पर MDR शुल्क का नया विवाद: क्या ‘डिजिटल टैक्स’ के मुद्दे से घिर सकती है केंद्र सरकार? – Jantak.com
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UPI ट्रांजैक्शन पर MDR शुल्क का नया विवाद: क्या ‘डिजिटल टैक्स’ के मुद्दे से घिर सकती है केंद्र सरकार?

डिजिटल भुगतान पर नए नियमों ने छेड़ी सियासी बहस

डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने ₹2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने का फैसला किया है। नए फ्रेमवर्क के तहत, ₹75,000 या उससे अधिक के बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 तय की गई है। हालांकि, सरकार ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि यह शुल्क सीधे तौर पर ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा और लगभग 96 प्रतिशत UPI ट्रांजैक्शन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे। सरकार का तर्क है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य UPI के इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करना, साइबर सिक्योरिटी को बेहतर बनाना और डिजिटल भुगतान प्रणाली को भविष्य के लिए टिकाऊ बनाना है।

विपक्ष का तीखा हमला: ‘डिजिटल लूट’ का लगाया आरोप

इस फैसले के सामने आते ही विपक्षी खेमे ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर इस निर्णय की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि यह कदम अमेरिकी पेमेंट कंपनियों के दबाव में उठाया गया है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि हालांकि ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन संख्या में केवल 5 प्रतिशत हैं, लेकिन UPI के कुल ट्रांजैक्शन मूल्य (Value) में इनकी हिस्सेदारी लगभग 65 प्रतिशत है, जिससे इसका आर्थिक प्रभाव व्यापक हो सकता है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे ‘मोदी सरकार की लूट’ करार देते हुए कहा कि महंगाई से पहले ही परेशान आम आदमी पर अब ‘डिजिटल टैक्स’ लगाकर उनकी बची-कुची बचत को खत्म करने की साजिश रची जा रही है।

विपक्ष इस मुद्दे को केवल एक तकनीकी शुल्क के रूप में नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक नैरेटिव के रूप में देख रहा है। जिस तरह 2024 के लोकसभा चुनावों में ‘संविधान बचाओ’ का मुद्दा केंद्र में रहा था, अब विपक्ष UPI विवाद को भी आर्थिक बोझ और अमेरिकी प्रभाव से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। कांग्रेस के सहयोगी दल भी भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं, जिससे यह मुद्दा वैश्विक कूटनीति और घरेलू अर्थव्यवस्था के बीच एक नया टकराव पैदा कर सकता है।

आगामी विधानसभा चुनावों पर संभावित असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आगामी उत्तर प्रदेश और पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। इन राज्यों में छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों के बीच UPI का उपयोग बहुत व्यापक है। यदि विपक्ष इस MDR शुल्क को ‘आम आदमी की जेब पर हमला’ के रूप में सफलतापूर्वक पेश कर पाता है, तो यह भाजपा के चुनावी अभियानों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में, जहां 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को समाजवादी पार्टी के सामने महत्वपूर्ण नुकसान झेलना पड़ा था, वहां यह आर्थिक मुद्दा चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।