संघर्ष, सादगी और सफलता: केदारनाथ में घोड़े की लगाम थामने वाले पवन को मिली अब नेतृत्व की कमान – Jantak.com
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संघर्ष, सादगी और सफलता: केदारनाथ में घोड़े की लगाम थामने वाले पवन को मिली अब नेतृत्व की कमान

उत्तराखंड के रतूड़ा गांव के रहने वाले 27 वर्षीय पवन कुमार ने जीवन के तमाम उतार-चढ़ावों से लड़ते हुए जो मुकाम हासिल किया है, वह हजारों युवाओं के लिए मिसाल बन चुका है। एक समय था जब पवन अपने पिता के साथ केदारनाथ में घोड़े-खच्चर चलाकर पर्यटकों को गंतव्य तक पहुंचाते थे, और आज वह अपने क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य के रूप में जनसेवा की नई राह पर चल पड़े हैं।

पढ़ाई की, पर नौकरी नहीं मिली — फिर भी नहीं मानी हार

पवन कुमार ने 2022 में गढ़वाल विश्वविद्यालय से एमए की पढ़ाई पूरी की। कई प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लिया, पर सफलता नहीं मिली। आमतौर पर जहाँ ऐसे हालात में युवा हताश होकर बैठ जाते हैं, वहीं पवन ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने पिता का पारंपरिक काम अपनाया और केदारनाथ यात्रा में घोड़े-खच्चर के सहारे रोज़गार की राह चुनी।

केदारनाथ के रास्तों से सीखी नेतृत्व की सीख

मई 2025 में जब केदारनाथ यात्रा शुरू हुई, तो पवन फिर यात्रियों को घोड़े पर बिठाकर दुर्गम रास्तों से मंदिर तक पहुंचाने में जुट गए। इसी दौरान जिला पंचायत चुनावों की घोषणा हुई और रतूड़ा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई। यह मौका था, और पवन ने बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के चुनाव लड़ने का साहसी निर्णय लिया।

उन्होंने न केवल चुनाव लड़ा, बल्कि पुराने राजनीतिक चेहरों को हराकर ज़बरदस्त जीत भी दर्ज की। उनकी ईमानदारी, सादगी और ज़मीन से जुड़ेपन ने लोगों का दिल जीत लिया।

पवन की सोच: “मैं अकेला नहीं, हम सब मिलकर बदलेंगे”

27 की उम्र में जनप्रतिनिधि बने पवन कहते हैं, “गरीबी और बेरोजगारी मैंने खुद झेली है। अब मेरी कोशिश रहेगी कि हमारे क्षेत्र के युवाओं को रास्ता दिखे, रोजगार मिले और किसी को अकेला न संघर्ष करना पड़े।”

उनकी प्राथमिकता है—

  • क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास

  • युवाओं के लिए स्वरोजगार और प्रशिक्षण केंद्र

  • सड़क और संचार जैसी बुनियादी जरूरतों की पूर्ति

प्रेरणा की मिसाल

पवन कुमार की यह कहानी सिर्फ चुनाव जीतने की नहीं है, बल्कि उन लाखों युवाओं की उम्मीद है जो कठिन हालातों से जूझ रहे हैं। उन्होंने सिद्ध कर दिया कि यदि इरादे मजबूत हों, तो घोड़ों की लगाम थामने वाला नौजवान भी एक दिन नेतृत्व की बागडोर थाम सकता है।

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