सड़क की मांग को लेकर ग्रामीणों का संघर्ष और प्रशासन की सक्रियता
कर्णप्रयाग के सकंड गांव में सड़क कनेक्टिविटी की समस्या ने अब एक गंभीर रूप ले लिया है। लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे ग्रामीणों ने जब प्रशासन से मदद की उम्मीद छोड़ दी, तो उन्होंने स्वयं ‘श्रमदान’ के माध्यम से सड़क कटिंग का काम शुरू कर दिया। ग्रामीणों के इस कड़े रुख और जमीनी स्तर पर शुरू हुए निर्माण कार्य को देखते हुए प्रशासन तुरंत हरकत में आया। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि क्षेत्र के DFO और SDM को ग्रामीणों की समस्याओं को समझने और मौके पर निर्णय लेने के लिए करीब 9 किलोमीटर का कठिन पैदल सफर तय कर गांव तक पहुंचना पड़ा।
दो घंटे तक चली गहन बैठक और वन भूमि पर विवाद
गांव पहुंचने के बाद अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जो करीब दो घंटे तक चली। इस चर्चा के दौरान सड़क निर्माण के तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर विस्तार से बात हुई। चूंकि सड़क का प्रस्तावित मार्ग वन भूमि से होकर गुजर रहा है, इसलिए निर्माण कार्य को लेकर कुछ कानूनी पेच भी सामने आए। बैठक में ग्रामीणों ने अपनी जरूरतों को मजबूती से रखा, जबकि अधिकारियों ने वन विभाग के नियमों और प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी। चर्चा के बाद फिलहाल एक सहमति बनी है कि वन भूमि पर चल रहे निर्माण कार्यों को अस्थाई रूप से रोक दिया जाएगा ताकि नियमों का उल्लंघन न हो।
लिखित आश्वासन और भविष्य की राह
हालांकि, ग्रामीणों के आक्रोश और उनकी बुनियादी जरूरतों को देखते हुए प्रशासन ने एक सकारात्मक रुख भी अपनाया है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को सड़क निर्माण की प्रक्रिया को आधिकारिक तौर पर आगे बढ़ाने के लिए लिखित आश्वासन दिया है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि वे वन भूमि के उपयोग और सड़क की मंजूरी के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास करेंगे। इस घटनाक्रम के बाद अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन के अगले कदमों पर टिकी हैं, क्योंकि लिखित आश्वासन मिलने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सड़क का निर्माण धरातल पर कब तक उतर पाता है।
