उत्तराखंड में सत्ता की कुर्सी बरकरार रखने और आगामी विधानसभा चुनावों में हैट्रिक लगाने के लक्ष्य के साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। ‘मिशन 2027’ को सफल बनाने के लिए पार्टी ने एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दिवाली से ठीक पहले, यानी अक्टूबर महीने में, भाजपा अपने विधायकों की क्षमता और लोकप्रियता को मापने के लिए एक निर्णायक फाइनल सर्वे कराने जा रही है। यह सर्वे तय करेगा कि किन मौजूदा विधायकों को दोबारा चुनावी मैदान में उतारा जाएगा और किनकी जगह नए चेहरों को मौका मिलेगा।
पार्टी के भीतर इस सर्वे को लेकर काफी हलचल है, क्योंकि इससे पहले किए गए एक सर्वे में दर्जन भर से अधिक विधायकों का प्रदर्शन बेहद कमजोर पाया गया था। इस बार भाजपा ने विधायकों की अग्निपरीक्षा के लिए 6 प्रमुख मानक (points) तैयार किए हैं, जिनके आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इन बिंदुओं में शामिल हैं:
भाजपा की रणनीति का एक बड़ा हिस्सा उन 23 सीटों को वापस पाने पर केंद्रित है, जो 2023 के विधानसभा चुनावों में पार्टी के हाथ से निकल गई थीं। संगठन इन सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए विशेष रूप से काम कर रहा है। हाल ही में आई एक सर्वे रिपोर्ट में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की बढ़ती लोकप्रियता और राज्य में भाजपा की मजबूत स्थिति के संकेत मिले हैं, जिसे पार्टी अपनी सबसे बड़ी ताकत मान रही है। हालांकि, विपक्षी दल कांग्रेस का दावा है कि राज्य का माहौल भाजपा के खिलाफ है, लेकिन भाजपा इस फाइनल सर्वे के जरिए अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देकर मैदान में उतरने की तैयारी में है।
