सोशल मीडिया पर वायरल ‘फेसबुक प्राइवेसी नोटिस’ निकला फेक, विशेषज्ञों ने दी सफाई
इन दिनों फेसबुक पर एक खास किस्म का पोस्ट तेजी से फैल रहा है। इसमें लोग लिख रहे हैं कि वे फेसबुक या मेटा को अपनी तस्वीरों और निजी जानकारी के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देते। साथ ही दूसरों से अपील की जा रही है कि वे इस टेक्स्ट को कॉपी-पेस्ट कर अपनी वॉल पर डालें, वरना कानूनी रूप से फेसबुक को उनकी जानकारी इस्तेमाल करने का अधिकार मिल जाएगा।
विशेषज्ञों ने साफ किया है कि इस तरह का पोस्ट पूरी तरह बेअसर है। फेसबुक पर अकाउंट बनाते समय हर यूजर प्लेटफॉर्म की शर्तें मानता है, जिसमें डेटा के उपयोग से जुड़े नियम पहले से तय होते हैं। किसी भी पोस्ट से इन्हें बदला नहीं जा सकता।
फेसबुक आपके नाम, जन्मदिन, लोकेशन, ब्राउजर, नेटवर्क और डिवाइस से जुड़ा डेटा सहित कई जानकारियां इकट्ठा करता है। अगर आप इसका इस्तेमाल सीमित करना चाहते हैं तो प्राइवेसी सेटिंग्स में जाकर बदलाव करें—जैसे कि पोस्ट विजिबिलिटी नियंत्रित करना, “Off-Facebook Activity” बंद करना, थर्ड-पार्टी ऐप्स हटाना और ऐड प्रेफरेंसेस एडजस्ट करना।
यह मैसेज नया नहीं है; पहले भी कई बार वायरल हो चुका है, बस इस बार यह हिंदी में और भारत में ट्रेंड कर रहा है। साइबर एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि ऐसे मैसेज पर आंख मूंदकर भरोसा करना हैकर्स को आपकी डिजिटल आदतों का अंदाजा दे सकता है। इसलिए किसी भी वायरल पोस्ट को शेयर करने से पहले उसकी सच्चाई जरूर जांचें।
