बड़ी खबर: हिमालयी महाकुंभ पर ब्रेक: नंदा देवी राजजात 2026 में नहीं, अब 2027 में होगी, दोनों पक्ष आमने- सामने
उत्तराखंड की सबसे पवित्र और ऐतिहासिक धार्मिक यात्राओं में शामिल नंदा देवी राजजात इस वर्ष आयोजित नहीं होगी। श्रीनंदा देवी राजजात समिति ने कर्णप्रयाग में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ किया कि हिमालयी क्षेत्रों में तैयारियों से जुड़े कई जरूरी कार्य अधूरे हैं, जिस वजह से यात्रा को टालने का फैसला लिया गया है। अब यह यात्रा 2027 में कराने की योजना है।
समिति के अध्यक्ष और गढ़वाल राजवंश के वंशज डॉ. राकेश कुंवर ने कहा कि निर्जन और दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में सड़क, पड़ाव, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं अभी उस स्तर पर नहीं पहुंच पाई हैं, जो इस विराट यात्रा के लिए जरूरी होती हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए यात्रा स्थगित करना ही उचित समझा गया।
फैसले पर विवाद: गौड़ पुजारी ने बताया आस्था से खिलवाड़
इस फैसले पर विरोध भी सामने आया है। नंदा धाम कुरुड़ के गौड़ पुजारी नरेश गौड़ ने इसे आस्था के साथ खिलवाड़ बताया। उनका कहना है कि नंदा देवी की वार्षिक यात्रा तय धार्मिक परंपरा के अनुसार चलती रही है और आगे भी चलती रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी समिति या राजा के फैसले से धार्मिक परंपराएं नहीं रोकी जा सकतीं। इस पूरे मुद्दे पर 19 जनवरी को नंदा धाम में बैठक बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।
कुरुड़–नौटी विवाद फिर उभरा, समिति पर मनमानी के आरोप
कुरुड़ और नंदा धाम क्षेत्र के लोगों ने पहले भी राजजात समिति पर परंपराओं की अनदेखी का आरोप लगाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यात्रा की तिथि और स्वरूप तय करने का अधिकार गौड़ ब्राह्मणों का होता है, लेकिन इस बार उनसे कोई संवाद नहीं किया गया।
नंदा धाम निवासी भगवती प्रसाद का आरोप है कि नौटी गांव के कुछ लोग समिति अध्यक्ष को गुमराह कर रहे हैं और यात्रा को केवल नौटी तक सीमित कर दिया गया है, जबकि ऐतिहासिक रूप से कुरुड़ की भूमिका अहम रही है।
समिति की दलील: अलग प्राधिकरण और मौसम बना वजह
प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. राकेश कुंवर ने चार अहम बातें रखीं—
नंदा देवी राजजात के लिए कुंभ की तर्ज पर अलग प्राधिकरण बनाने का प्रस्ताव शासन को दिया गया है।
यह प्राधिकरण केवल राजजात ही नहीं, बल्कि नंदा देवी लोकजात, वार्षिक यात्राओं और मेलों के विकास पर भी काम करेगा।
धार्मिक परंपराओं में कोई हस्तक्षेप नहीं होगा, अनुष्ठान राजवंशीय परंपरा के अनुसार ही होंगे।
सितंबर में पड़ने वाले यात्रा काल के दौरान बर्फबारी और खराब मौसम की आशंका के चलते भी 2026 की यात्रा टालना जरूरी था।
सरकार का पक्ष: काम स्वीकृत, जल्द शुरू होंगे निर्माण कार्य
पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने समिति के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राजजात से जुड़े विकास कार्यों के लिए 239 करोड़ रुपये के प्रस्ताव तैयार कर लिए गए हैं और अधिकांश कार्य स्वीकृत हो चुके हैं।
उन्होंने बताया कि चमोली जिले को 20 करोड़ रुपये एडवांस जारी किए गए हैं, ताकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सड़क निर्माण तुरंत शुरू किया जा सके। कुरुड़ और नौटी के बीच चल रहे विवाद पर उन्होंने कहा कि शासन स्तर पर दोनों पक्षों से बातचीत कर समाधान निकाला जाएगा।
क्या है नंदा देवी राजजात यात्रा?
नंदा देवी राजजात उत्तराखंड की सबसे लंबी और दुर्लभ धार्मिक पैदल यात्रा मानी जाती है। करीब 280 किलोमीटर लंबी इस यात्रा में देवी नंदा को उनके मायके से कैलाश (ससुराल) भेजने की परंपरा निभाई जाती है।
यह यात्रा रूपकुंड, शैल समुद्र ग्लेशियर और होमकुंड तक जाती है। वाण गांव के बाद यात्रा अत्यंत कठिन हो जाती है, जहां से केवल चुने हुए लोग ही आगे बढ़ते हैं। सैकड़ों देवी-देवताओं की डोलियां और हजारों श्रद्धालु इस हिमालयी महाकुंभ में शामिल होते हैं।
