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मसूरी में लिखा गया भारत का पहला वैलेंटाइन लेटर? मोगर मांक और एलिजाबेथ की प्रेम कथा

वैलेंटाइन डे का नाम आते ही जहां लाल गुलाब और रोमांटिक डिनर याद आते हैं, वहीं उत्तराखंड की मसूरी से जुड़ी एक पुरानी कहानी इस दिन को अलग मायने देती है।

स्थानीय इतिहास के अनुसार, 14 फरवरी 1843 को मसूरी में रह रहे एक ब्रिटिश शिक्षक मोगर मांक ने अपनी बहन को एक पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने एलिजाबेथ लुईन नाम की युवती के प्रति अपने प्रेम का जिक्र किया। कहा जाता है कि बाद में यह पत्र ‘Mussoorie Merchant – The Indian Letters’ नामक पुस्तक में प्रकाशित हुआ और करीब 150 साल बाद फिर चर्चा में आया।

पहाड़ों में शुरू हुआ रिश्ता

ब्रिटेन से पढ़ाने आए मोगर मांक परिवार से दूर थे और अकेलापन महसूस करते थे। इसी दौरान एलिजाबेथ से मुलाकात हुई। दोस्ती ने धीरे-धीरे प्रेम का रूप लिया। शादी के बाद वे पत्नी को लेकर ब्रिटेन लौटना चाहते थे, लेकिन यात्रा के दौरान बीमारी से उनकी मौत हो गई। एलिजाबेथ वापस मसूरी लौटीं और यहीं शिक्षण कार्य में लग गईं। प्रेम अधूरा रहा, मगर खत ने उसे यादगार बना दिया।

क्या यही भारत का पहला ‘वैलेंटाइन’ था?

इतिहास बताता है कि वैलेंटाइन डे की शुरुआत यूरोप से हुई और भारत में यह 1990 के दशक के बाद लोकप्रिय हुआ। फिर भी मसूरी की यह कहानी संकेत देती है कि 19वीं सदी में भी 14 फरवरी को प्रेम से जोड़कर देखा जा रहा था। कुछ लोग इसे भारत में वैलेंटाइन डे की शुरुआती झलक मानते हैं।

आज की मसूरी, आज का इज़हार

आज 14 फरवरी को मसूरी में खास रौनक रहती है। होटल-कैफे स्पेशल ऑफर देते हैं, कपल्स माल रोड और व्यू पॉइंट्स पर वक्त बिताते हैं। पहले प्यार खतों में लिखा जाता था, आज मैसेज और सोशल मीडिया पर।

समय बदला है, तरीका बदला है—लेकिन पहाड़ों की ठंडी हवा में मोहब्बत की गर्माहट आज भी वही है।