Uttarakhand

देहरादून में चौंकाने वाली खोज: शिवालिक में पहली बार मिले जलीय जीवों के जीवाश्म

देहरादून के बाहरी क्षेत्र में हुई एक नई वैज्ञानिक खोज ने शोधकर्ताओं को चौंका दिया है। Dehradun के पास शिवालिक की तलहटी में चल रहे अध्ययन के दौरान पहली बार जलीय जीवों के जीवाश्म मिले हैं। अब तक यह इलाका मुख्य रूप से स्थलीय (जमीनी) जीवों के अवशेषों के लिए जाना जाता था, लेकिन इस नई खोज ने यहां के प्राचीन पर्यावरण को लेकर वैज्ञानिकों की सोच बदलने के संकेत दिए हैं।

इस महत्वपूर्ण खोज में Wadia Institute of Himalayan Geology और अन्य संस्थानों के वैज्ञानिक शामिल हैं। शोध के दौरान उन्हें ताजे पानी की तीन अलग-अलग प्रजातियों की मछलियों—स्नेकहेड, गोबी और गौरामी—के जीवाश्म मिले हैं। खास बात यह है कि ये जीवाश्म मछलियों की कान की हड्डियों (ओटोलिथ) के रूप में पाए गए हैं, जो उनके अस्तित्व का मजबूत प्रमाण माने जाते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार ये जीवाश्म लगभग 50 लाख से 25 लाख साल पुराने, यानी प्लायोसीन युग के हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि इनकी उम्र करीब 45 लाख साल हो सकती है। इस खोज से यह साबित होता है कि उस समय उत्तर भारत में ताजे पानी का समृद्ध इकोसिस्टम मौजूद था।

शोध से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिक Ningthoujam Premjit Singh का कहना है कि गौरामी मछली का यह जीवाश्म भारत में पहली बार मिला है। इससे पहले इसकी उपस्थिति इंडोनेशिया के सुमात्रा में दर्ज की गई थी। ऐसे में यह खोज न सिर्फ भारत बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के जलीय जीवों के इतिहास को समझने में अहम भूमिका निभाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में और अधिक खुदाई व अध्ययन किया जाए, तो और भी नई प्रजातियों के जीवाश्म मिल सकते हैं। इससे प्राचीन जैव-विविधता और उस समय के पर्यावरण को और बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।