मक्का में पहली बार ‘इमरजेंसी अलर्ट’: हूती विद्रोहियों के मिसाइल हमले से सऊदी अरब में भारी दहशत

यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद मक्का में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट जारी किया गया है। इस हमले ने पवित्र शहर की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

मक्का में पहली बार ‘इमरजेंसी अलर्ट’: हूती विद्रोहियों के मिसाइल हमले से सऊदी अरब में भारी दहशत

हूती हमलों के बाद मक्का में हाई अलर्ट जारी

यमन के हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की एक नई लहर छेड़ दी, जिसके बाद पवित्र शहर मक्का में पहली बार ‘इमरजेंसी अलर्ट’ जारी किया गया। सऊदी सिविल डिफेंस के नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म (National Early Warning Platform) ने तत्काल प्रभाव से नागरिकों को सचेत करते हुए सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी। इस दौरान लोगों को ऊंची इमारतों, कांच की खिड़कियों, बालकनियों और खुले स्थानों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई। हालांकि, कुछ समय बाद सिविल डिफेंस ने स्थिति सामान्य होने की सूचना दी, लेकिन मक्का के साथ-साथ जेद्दा और ताइफ में भी कुछ समय के लिए इसी तरह के अलर्ट जारी किए गए थे।

सुरक्षा व्यवस्था और ऐतिहासिक संदर्भ

सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था के लिए यह हमला एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। गौरतलब है कि इससे पहले 27 जुलाई 2017 को भी हूती विद्रोहियों ने मक्का की ओर एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी, जिसे मक्का से लगभग 69 किलोमीटर दूर अल-वसिलिया इलाके में सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया गया था। हालिया हमलों में हूतियों ने खमिस मुशैत, अबहा और ताइफ जैसे महत्वपूर्ण शहरों को निशाना बनाया है। सऊदी सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता कर्नल तुर्की अल-मलिकी ने इन हमलों को नागरिकों को निशाना बनाने वाला एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। पिछले कुछ दिनों के हमलों में अब तक दर्जनों नागरिक घायल हो चुके हैं और कुछ ऊर्जा सुविधाओं (energy facilities) के संचालन को भी रोकना पड़ा है।

बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक प्रभाव

हूती विद्रोहियों का यह आक्रामक रुख न केवल सऊदी अरब की आंतरिक सुरक्षा, बल्कि वैश्विक व्यापार के लिए भी संकट पैदा कर रहा है। हूतियों ने लाल सागर के तट पर अपना नियंत्रण तेजी से बढ़ाया है और हाल ही में उन्होंने ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश द्वीपों पर कब्जा कर लिया है। इस बढ़ते खतरे को देखते हुए सऊदी अरब ने अपने सहयोगियों से सैन्य मदद की अपील की है। हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान ने सऊदी अरब की मदद करने से इनकार कर दिया है; पाकिस्तान का रुख स्पष्ट है कि वह सऊदी की जमीन की रक्षा के लिए तैनात हो सकता है, लेकिन वह किसी दूसरे देश के युद्ध में सक्रिय रूप से शामिल नहीं होगा। मक्का की सुरक्षा, जो वर्तमान में 4-लेयर सुरक्षा प्रणाली के तहत की जाती है, इस निरंतर बढ़ते खतरे के कारण अत्यधिक दबाव में है।