पाकिस्तान की युद्ध की आहट और भारत की सैन्य तैयारी: एक्सपर्ट ने रशिया के साथ रक्षा सहयोग के लिए दिया 6-सूत्रीय रोडमैप

मेजर जनरल (रिटायर्ड) जीडी बख्शी ने पाकिस्तान की संभावित युद्ध नीतियों पर चेतावनी देते हुए भारत को अपनी सैन्य शक्ति तेजी से बढ़ाने की सलाह दी है। उन्होंने रूस से आधुनिक हथियारों की खरीद के लिए 6 महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।

पाकिस्तान की युद्ध की आहट और भारत की सैन्य तैयारी: एक्सपर्ट ने रशिया के साथ रक्षा सहयोग के लिए दिया 6-सूत्रीय रोडमैप

मेजर जनरल (रिटायर्ड) जीडी बख्शी ने हाल ही में पाकिस्तान की रणनीतिक गतिविधियों को लेकर एक बेहद गंभीर चेतावनी जारी की है। उनका मानना है कि पाकिस्तान अपने देश के भीतर चल रहे आंतरिक संकटों और जन-असंतोष से ध्यान हटाने के लिए युद्ध की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर सकता है, जिसमें पानी जैसे संवेदनशील मुद्दों को आधार बनाया जा सकता है। बख्शी ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत के पास अब सोचने के लिए बहुत कम समय बचा है और देश को अपनी ‘नौकरशाही वाली सुस्ती’ को त्यागकर रक्षा तैयारियों में तेजी लानी होगी।

रूस के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत करने के 6 प्रमुख सुझाव

सैन्य विशेषज्ञ ने भारत की रक्षा क्षमताओं को अभूतपूर्व स्तर पर ले जाने के लिए रूस के साथ सहयोग बढ़ाने का एक विस्तृत खाका पेश किया है। उन्होंने निम्नलिखित 6 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जोर दिया है ताकि भारत की सैन्य शक्ति को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके:

  • S-400 और S-500 का विस्तार: पांच और S-400 मिसाइल बैटरियों की खरीद और नई S-500 बैटरियों के अधिग्रहण की आवश्यकता।
  • स्टील्थ तकनीक: अंतरिम समाधान के रूप में Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट्स की खरीद।
  • समुद्री शक्ति: हिंद महासागर में बढ़त बनाए रखने के लिए रूसी परमाणु पनडुब्बी को लीज़ पर लेना।
  • मिसाइल क्षमता: भारत की किलो क्लास सबमरीन (Kilo-class submarines) की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए कैलिबर (Kalibr) मिसाइलों की खरीद।
  • सिविल एविएशन: नागरिक उड्डयन क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए कम दूरी वाले कमर्शियल एयरक्राफ्ट की खरीद।
  • विशेषज्ञ का यह दृष्टिकोण भारत की सामरिक स्वायत्तता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। बख्शी के अनुसार, यदि भारत समय रहते इन बड़ी कमियों को दूर करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता है, तो भविष्य में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां और भी जटिल हो सकती हैं। वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में, रूस के साथ इन रक्षा सौदों को पूरा करना न केवल सैन्य संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है, बल्कि यह भारत की रक्षा जरूरतों को तेजी से पूरा करने का एक प्रभावी तरीका भी साबित हो सकता है।